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आठ साल में तीन गुना बढ़ी महिला श्रम भागीदारी, प्रदेश ने दर्ज किया नया रिकॉर्ड

विकसित यूपी @2047 के विजन में आत्मनिर्भर नारी और बंपर व्यापार को राज्य की प्रगति का मूल आधार माना गया है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश कई चुनौतियों से घिरा हुआ था। बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत थी और लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (एलएफपीआर) मात्र 44.6 प्रतिशत रह गया था। सबसे बड़ी चिंता महिला श्रम भागीदारी दर की थी, जो सिर्फ 13.5 प्रतिशत पर अटकी हुई थी। अब ये बढ़कर 34.5 फीसदी हो गई है।

वर्तमान में प्रदेश का एलएफपीआर 44.6 प्रतिशत से बढ़कर 56.9 प्रतिशत हो गया। महिला श्रम भागीदारी दर में भी ऐतिहासिक उछाल आया और यह 13.5 से बढ़कर सीधे 34.5 प्रतिशत तक पहुंच गई। बेरोजगारी दर घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई और अकेले एमएसएमई सेक्टर से 1.65 करोड़ रोजगार सृजित हुए। औद्योगिक ऋण 3.54 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 9.24 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा।

प्रदेश में पंजीकृत फैक्टरियों की संख्या 14169 से बढ़कर 27295 तक हो गई हैं। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के अंतर्गत 77 उत्पादों को जीआई टैग मिला है, जिसके बाद उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर पहले स्थान पर पहुंच गया है। एमएसएमई इकाइयों की संख्या 96 लाख हो गई, जो पूरे देश में सबसे अधिक है।

सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक प्रदेश में महिला श्रम भागीदारी दर 50 प्रतिशत हो और 2047 तक यह पुरुषों के बराबर पहुंचे।

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