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FMCG की कीमतों पर सरकार की पैनी निगरानी, ई-कॉमर्स कंपनियां भी टारगेट

केंद्र सरकार ने FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) उत्पादों पर जीएसटी दर कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है या नहीं, इस पर निगरानी शुरू कर दी है। मंगलवार को सरकारी सूत्रों ने बताया कि कुछ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर दैनिक आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षित कटौती न होने की शिकायतें मिल रही हैं। क्षेत्रीय कार्यालय मूल्य परिवर्तनों पर नजर रख रहे हैं।

30 सितंबर तक आएगी पहली रिपोर्ट
उन्होंने कहा कि हम कीमतों में बदलाव की निगरानी कर रहे हैं। क्षेत्रीय कार्यालय निगरानी कर रहे हैं और हमें 30 सितंबर तक उनसे पहली रिपोर्ट मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि हम ऐसी शिकायतों पर कोई त्वरित प्रतिक्रिया नहीं चाहते।

22 सितंंबर से नई दरें लागू
22 सितंबर से प्रभावी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) 5 और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय संरचना बन गया है। 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की पूर्व दरों को 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो दरों में मिला दिया गया है। इससे 99 प्रतिशत दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें कम हो गई हैं।

मुनाफाखोरी से संबंधित शिकायतों के लिए मुनाफाखोरी-रोधी तंत्र सक्षम नहीं किया गया है, फिर भी सरकार मूल्य निर्धारण पर नजर रख रही है। साथ ही विभिन्न कंपनियों ने स्वयं आगे आकर कहा है कि वे कीमतें कम करके कर कटौती का लाभ दे रही हैं।

वित्त मंत्रालय ने 9 सितंबर को केंद्रीय जीएसटी के क्षेत्रीय अधिकारियों को पत्र लिखकर 54 आम इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुओं की कीमतों में बदलाव की मासिक रिपोर्ट पेश करने को कहा था। इन वस्तुओं के ब्रांडवार अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के तुलनात्मक विवरण पर पहली रिपोर्ट 30 सितंबर तक केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) को सौंपनी होगी। 54 वस्तुओं की सूची में मक्खन, शैम्पू, टूथपेस्ट, टोमैटो केचप, जैम, आइसक्रीम, एसी, टीवी, सभी डायग्नोस्टिक किट, ग्लूकोमीटर, पट्टियां, थर्मामीटर, रबड़, क्रेयॉन और सीमेंट आदि शामिल हैं।

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