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पॉक्सो मामले में कोर्ट ने स्पष्ट किया: शादी का दावा बचाव के लिए स्वीकार्य नहीं

बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागपुर बेंच ने एक आरोपी की याचिका खारिज कर दी, जिसमें वह नाबालिग लड़की के साथ शादी और बच्चे के जन्म का हवाला देकर पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज दुष्कर्म मामले से बरी होने की मांग कर रहा था। जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के और जस्टिस नंदेश देशपांडे ने स्पष्ट किया कि नाबालिग के साथ सहमति या बाद में शादी करना आरोपी को अपराध से मुक्त नहीं करता।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता की उम्र शादी के समय 17 साल थी और इस साल मई में उसने बच्चा जन्म दिया। आरोपी ने दावा किया कि दोनों के बीच आपसी सहमति थी और शादी लड़की के 18 साल पूरे होने पर पंजीकृत की गई। हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि पॉक्सो कानून का मुख्य उद्देश्य 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण और उत्पीड़न से बचाना है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी को यह समझ होना चाहिए था कि लड़की के 18 साल होने तक इंतजार करना आवश्यक है। केवल यह दावा कि अब बच्चा हो गया है, आरोपी के गैरकानूनी कृत्यों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

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