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जर्मनी ने इस्राइल को दिया बड़ा झटका, हमास से युद्ध के बीच हथियारों के निर्यात पर लगाई रोक

नई दिल्ली:  जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने शुक्रवार को कहा कि उनका देश फिलहाल ऐसे किसी भी सैन्य उपकरण के निर्यात को मंजूरी नहीं देगा, जिसका इस्तेमाल गाजा में किया जा सकता है। यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। जर्मनी दशकों से इस्राइल का मजबूत समर्थक रहा है।

अपने बयान में मर्ज ने जोर देकर कहा कि इस्राइल को हमास के आतंक से अपनी रक्षा करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि इस्राइली बंधकों की रिहाई और 22 महीने से चल रहे संघर्ष में युद्धविराम के लिए ठोस बातचीत ‘हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता’ है। मर्ज ने यह भी कहा कि गाजा के भविष्य में हमास की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।

गाजा पट्टी में इस्राइली सेना की और भी सख्त सैन्य कार्रवाई, जिसे कल रात इस्राइली कैबिनेट ने मंजूरी दी, जर्मन सरकार के लिए यह देखना और भी मुश्किल बना रही है कि ये लक्ष्य कैसे हासिल होंगे। मर्ज ने कहा, ऐसे हालात में जर्मन सरकार अगले आदेश तक ऐसे किसी भी सैन्य उपकरण के निर्यात को मंजूरी नहीं देगी, जिसका इस्तेमाल गाजा पट्टी में किया जा सकता है।

हमास ने सात अक्तूबर 2023 को इस्राइल के कई हिस्सों पर हमला किया था। जिसमें करीब 1200 इस्राइली नागरिकों की मौत हो गई थी और करीब ढाई लोगों को बंधक बना लिया गया था। इनमें कई की मौत हो चुकी है, कुछ को समझौतों के तहत रिहा किया जा चुका है, जबकि कुछ अब भी हमास के कब्जे हैं। वहीं, इसके जवाब में इस्राइल ने हमास के खिलाफ युद्ध का एलान किया। युद्ध शुरू होने के बाद से 60 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। जिनमें अधिकांश बच्चे और महिलाएं शामिल हैं।

गाजा की पूरी आबादी विस्थापित है और भुखमरी का सामना कर रही है। एक दिन पहले इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश गाजा पट्टी पर कब्जा या उसे अपने देश में मिलाना नहीं चाहता। उनका एकमात्र लक्ष्य हमास को नष्ट करना और फिर गाजा को एक अस्थायी सरकार को सौंपना है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा कि युद्ध खत्म होने के बाद इस्राइल गाजा की सुरक्षा अपने हाथ में लेना चाहता है।

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