Uttar Pradesh

नगर निगम कार्यकारिणी का चुनाव 17 को, भाजपा में आपसी खींचतान से क्रॉस वोटिंग की आशंका

लखनऊ:  विवाद के बीच नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों का चुनाव रविवार 17 अगस्त को होगा। भाजपा में चल रही आपसी खींचतान से क्रॉस वोटिंग की आशंका है। छह पदों में से भाजपा पांच और सपा एक पद पर लड़ने के लिए सहमत है, ताकि निर्विरोध चुनाव हो जाए। सपा ने एक नाम भी तय किया है, पर भाजपा में खींचतान थम नहीं रही है। चर्चा तो यह भी है कि महापौर को ताकत दिखाने के लिए विरोधी गुट चुनाव में एक-दो प्रत्याशी और उतार सकता है।

एक जून को कार्यकारिणी के छह सदस्य रिटायर हुए हैं। नए सदस्य चुनने के लिए पार्षद, महापौर, शहर के विधायक, विधान परिषद सदस्य, सांसद और राज्यसभा सदस्य वोट डालते हैं। नगर निगम की ओर से बनाई गई वोटर लिस्ट में 131 नाम हैं। इनमें 110 पार्षद, महापौर के अलावा 20 सांसद, राज्ससभा सदस्य, विधायक और एमएलसी हैं। कार्यकारिणी में बचे सदस्यों में भाजपा के अनुराग मिश्रा अन्नू, भृगुनाथ शुक्ला, चरनजीत गांधी, गौरी सांवरिया, कृष्ण नारायण सिंह और सपा की सबा अहसन मंसूरी हैं।

अब इन नामों की चर्चा
पूर्व में जारी किए गए नामों में से देव शर्मा मिश्रा मुन्ना, अमित चौधरी और रीता राय का नाम काट दिया गया है। अब रामनरेश रावत, पृथ्वी गुप्ता, संदीप शर्मा, अरुण राय और राजेश सिंह गब्बर के नाम तय बताए जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि सालभर पहले रामनरेश का महापौर से छत्तीस का आंकड़ा था, लेकिन इधर वह उनके सबसे खास हो गए हैं। सपा ने राम नरेश चौरसिया का नाम तय किया है।

… इसलिए चल रहा विवाद
26 जून को भाजपा महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी की ओर से पांच पदों के लिए छह नाम तय कर जारी किए गए। इनमें पार्षद देव शर्मा मिश्रा मुन्ना, राजेश सिंह गब्बर, रीता राय, संदीप शर्मा, अमित चौधरी और पृथ्वी गुप्ता के नाम थे। हालांकि, शर्त लगाई गई कि चुनाव पांच पदों पर ही लड़ा जाएगा। चुनाव लड़ेगा कौन, यह महापौर तय करेंगी।

इस पर बखेड़ा खड़ा हो गया। महापौर का कहना था कि जब पांच सदस्य चुनाव लड़ेंगे तो छह नाम क्यों भेजे गए? जो नाम भाजपा महानगर अध्यक्ष की ओर से तय किए गए, उनमें से ज्यादातर महापौर के विरोधी माने जाते हैं। इसका नतीजा यह हुआ कि कार्यकारिणी की बैठक ही टाल दी गई। इसके बाद से नाम तय करने को लेकर विवाद चलता रहा और बैठक नहीं बुलाई जा रही थी। अब जब बैठक बुलाई गई तो यह चर्चा हो रही है कि महापौर संगठन पर भारी पड़ गई हैं और सूची से वे नाम बाहर हो गए हैं, जो उनके धुर विरोधी माने जाते हैं।

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